एक अंतरिक्ष यान मंगल ग्रह के पास से गुजरते हुए, गुरुत्वाकर्षण का उपयोग करके तेज गति से आगे बढ़ रहा है।
एक अंतरिक्ष यान मंगल ग्रह के पास से गुजरते हुए, गुरुत्वाकर्षण का उपयोग करके तेज गति से आगे बढ़ रहा है।

मंगल के गुरुत्वाकर्षण का फायदा उठाकर आगे बढ़ने का यह तरीका, इस विज्ञान के दृष्टिकोण को देखने वाले किसी दोस्त के लिए भी समझदारी भरा संदर्भ लेकर आता है।

नासा का प्रोब मंगल की गुलेल से आगे कहानी का प्रवाह और मुख्य तथ्य

नासा का साइकी स्पेसक्राफ्ट 15 मई, 2026 को मंगल ग्रह के बेहद करीब से गुजरेगा, ताकि ग्रह के गुरुत्वाकर्षण का उपयोग करके अपनी गति बढ़ा सके। इस तकनीक को 'ग्रेविटी असिस्ट' या 'ग्रेविटी स्लिंगशॉट' कहा जाता है। प्रोब मंगल की सतह से महज 4,500 किलोमीटर ऊपर से गुजरेगा और इसकी रफ्तार लगभग 20,000 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच जाएगी।

इस मैनेवर से नासा ईंधन की बचत करेगा और साइकी एस्टेरॉयड तक पहुंचने का रास्ता आसान होगा। प्रोब सोलर-इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन पर चलता है और जेनन गैस का उपयोग करता है। बिना ग्रेविटी असिस्ट के इस मिशन को अधिक ईंधन और भारी लॉन्च वाहन की आवश्यकता होती।

फ्लाईबाय के दौरान साइकी प्रोब के वैज्ञानिक उपकरण सक्रिय रहेंगे। यह मंगल की हजारों तस्वीरें लेगा, उसके चारों ओर के धूल के छल्लों की खोज करेगा और मैग्नेटिक फील्ड व कॉस्मिक रेज का विश्लेषण करेगा। नासा के मौजूदा मंगल रोवर और ऑर्बिटर भी इस घटना पर नजर रखेंगे।

साइकी एस्टेरॉयड मंगल और बृहस्पति के बीच स्थित है। वैज्ञानिक मानते हैं कि यह किसी प्राचीन ग्रह का लोहे और निकल से बना कोर हो सकता है। इसका अध्ययन पृथ्वी जैसे ग्रहों के गठन को समझने में मदद करेगा। मिशन 2029 में एस्टेरॉयड तक पहुंचने का लक्ष्य रखता है।

तथ्य

  • नासा का साइकी प्रोब 15 मई 2026 को मंगल ग्रह के 4,500 किमी के भीतर से गुजरेगा।
  • मंगल के गुरुत्वाकर्षण का उपयोग करके प्रोब की रफ्तार लगभग 20,000 किमी/घंटा तक पहुंच जाएगी।
  • इस ग्रेविटी असिस्ट से ईंधन की बचत होगी और प्रोब का रास्ता आसान होगा।
  • प्रोब फ्लाईबाय के दौरान मंगल की तस्वीरें लेगा और उसके मैग्नेटिक फील्ड का विश्लेषण करेगा।
  • साइकी एस्टेरॉयड मंगल और बृहस्पति के बीच स्थित है और 2029 में इस तक पहुंचने का लक्ष्य है।

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