एक अंतरिक्ष यान पृथ्वी से मंगल ग्रह की ओर उड़ रहा है, पृष्ठभूमि में एक एस्टेरॉयड का पथ दिखाया गया है जिसने नए रास्ते की खोज में मदद की।
एक अंतरिक्ष यान पृथ्वी से मंगल ग्रह की ओर उड़ रहा है, पृष्ठभूमि में एक एस्टेरॉयड का पथ दिखाया गया है जिसने नए रास्ते की खोज में मदद की।

मंगल तक यात्रा का समय आधा हो सकता है, इस बदलाव को देख रहे किसी दोस्त के लिए उपयोगी संदर्भ देती है।

मंगल यात्रा का समय आधा? कहानी का प्रवाह और मुख्य तथ्य

ब्राजील के खगोल भौतिकी वैज्ञानिक मार्सेलो डी ओलिवेरा सूजा ने एक अप्रत्याशित खोज के जरिए मंगल ग्रह तक यात्रा के समय को काफी कम करने की संभावना दिखाई है। वर्ष 2015 में एस्टेरॉयड '2001 सीए21' के शुरुआती डेटा के विश्लेषण के दौरान उन्होंने एक ऐसे ऑर्बिटल पथ की संभावना देखी, जो अंतरिक्ष यान को पृथ्वी से मंगल तक बहुत कम समय में पहुंचा सकता है। उनकी गणनाओं के अनुसार, विशेष ग्रहीय संरेखण के दौरान यह सफर केवल 34 दिनों में पूरा हो सकता है। भविष्य की योजनाओं में 2031 को सबसे उपयुक्त समय माना गया है, जब पूरी यात्रा मात्र 153 दिनों में पूरी हो सकती है।

इस खोज का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि वर्तमान में मंगल मिशन की कुल अवधि लगभग तीन साल मानी जाती है। यदि यह नई तकनीक सफल होती है, तो यह न केवल अंतरिक्ष यात्रा के खर्च को कम करेगी, बल्कि यात्रियों के लिए स्वास्थ्य जोखिमों को भी घटाएगी। हालांकि, इसके लिए स्पेसक्राफ्ट को 32.5 किलोमीटर प्रति सेकंड की गति से उड़ान भरनी होगी, जो मौजूदा रॉकेट तकनीक से आगे है। इसके अलावा, इतनी तेज गति से मंगल की सतह पर सुरक्षित लैंडिंग करना अभी एक बड़ी चुनौती है।

वैज्ञानिकों का मानना है कि भविष्य में स्पेसएक्स का 'स्टारशिप' और ब्लू ओरिजिन का 'न्यू ग्लेन' जैसे शक्तिशाली रॉकेट इस तरह की गति हासिल करने में सक्षम हो सकते हैं। इस खोज ने इंसान के मंगल पर बसने के सपने को और करीब ला दिया है। अब तक यह माना जाता था कि मंगल तक यात्रा और वापसी में कई साल लग जाते हैं, लेकिन यह नई खोज उस सोच को बदल रही है।

तथ्य

  • ब्राजील के वैज्ञानिक मार्सेलो डी ओलिवेरा सूजा ने 2015 में एस्टेरॉयड '2001 सीए21' के डेटा से प्रेरित होकर एक नए ऑर्बिटल पथ की खोज की।
  • उनकी गणनाओं के अनुसार, अक्टूबर 2020 जैसे ग्रहीय संरेखण में मंगल तक सफर 34 दिनों में पूरा हो सकता है।
  • 2031 को सबसे उपयुक्त समय माना गया है, जब पूरी यात्रा मात्र 153 दिनों में पूरी हो सकती है।
  • इस योजना के लिए स्पेसक्राफ्ट को 32.5 किमी/सेकंड की गति से उड़ना होगा, जो मौजूदा तकनीक से आगे है।
  • स्पेसएक्स का 'स्टारशिप' और ब्लू ओरिजिन का 'न्यू ग्लेन' भविष्य में इस तरह की गति हासिल कर सकते हैं।

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