
चंद्रमा पर बर्फ की यह खोज लंबे समय तक रहने वाले मिशनों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है, खासकर उस दोस्त के लिए जो अंतरिक्ष अन्वेषण की भावी संभावनाओं पर नजर रखता है।

चंद्रयान-2 ने चांद पर खोजी अंडरग्राउंड बर्फ कहानी का प्रवाह और मुख्य तथ्य
भारत के चंद्रयान-2 मिशन के डेटा के विश्लेषण से चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के नीचे अंडरग्राउंड बर्फ के ठोस सबूत मिले हैं। फिजिकल रिसर्च लैबोरेटरी (PRL) के वैज्ञानिकों ने रडार डेटा के जरिए उन गहरे, स्थायी छाया वाले गड्ढों का अध्ययन किया, जहां तापमान माइनस 248 डिग्री सेल्सियस तक रहता है। इन परिस्थितियों में पानी बर्फ के रूप में लंबे समय तक सुरक्षित रह सकता है।
अध्ययन में नौ 'डबल शैडो' वाले गड्ढों पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिनमें से चार में रडार सिग्नल बर्फ के जमाव के अनुरूप मिले। सबसे मजबूत संकेत 'फॉस्टिनी' क्रेटर के अंदर स्थित 'F2' गड्ढे से मिले, जहां उच्च सर्कुलर पोलराइजेशन रेशियो और कम डीपोलराइजेशन सिग्नल ने बर्फ की उपस्थिति की पुष्टि की। यह खोज इस बहस को भी सुलझाती है कि ध्रुवीय रडार परावर्तन चट्टानों की वजह से हैं या बर्फ की।
चंद्रमा पर पानी भविष्य के मानव मिशनों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। बर्फ से पीने का पानी, सांस लेने योग्य ऑक्सीजन और रॉकेट ईंधन बनाया जा सकता है। यह खोज भारत, अमेरिका और चीन जैसे देशों के बीच चंद्रमा पर बसावट की बढ़ती प्रतिस्पर्धा में महत्वपूर्ण है। अगले मिशनों के लिए उतरने के स्थान का चयन अब इन बर्फ भंडारों के आधार पर हो सकता है।
तथ्य
- चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर के रडार डेटा से चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के नीचे अंडरग्राउंड बर्फ के सबूत मिले।
- फिजिकल रिसर्च लैबोरेटरी (PRL) के वैज्ञानिकों ने डेटा का विश्लेषण कर निष्कर्ष निकाला।
- नौ गहरे गड्ढों में से चार में बर्फ के जमाव के रडार संकेत मिले, विशेषकर 'F2' गड्ढे में।
- तापमान माइनस 248 डिग्री सेल्सियस तक होने से बर्फ लंबे समय तक सुरक्षित रह सकती है।
- बर्फ का उपयोग भविष्य में पीने के पानी, ऑक्सीजन और रॉकेट ईंधन के रूप में किया जा सकता है।
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