
रेतीले तूफान सिर्फ तबाही नहीं, बल्कि पोषक तत्वों का भी वाहक हैं, इस विज्ञान को समझने वाले दोस्त के लिए यह संदर्भ उपयोगी है।

राजस्थान में रेतीला बवंडर: आसमान में क्यों छा गया अंधेरा? कहानी का प्रवाह और मुख्य तथ्य
30 मई 2026 को राजस्थान में तेज रेतीले बवंडर ने दिन में अंधेरा छा दिया। 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवाओं ने धूल का घना गुबार उठाया, जो 100 फीट ऊंचाई तक दिखाई दिया। इस घटना ने फिर से रेतीले तूफानों के विज्ञान और उनके पर्यावरणीय प्रभाव पर चर्चा छेड़ दी। रेतीले तूफान तब उठते हैं जब तेज हवाएं सूखी, बंजर जमीन से धूल और रेत उठाकर वातावरण में फैला देती हैं। छोटे कण हवा के साथ हजारों किलोमीटर दूर तक जा सकते हैं।
हर साल लगभग 2 अरब टन रेत और धूल वायुमंडल में 12 किलोमीटर तक की ऊंचाई पर पहुंचती है, जिसमें से आधा हिस्सा सहारा रेगिस्तान से आता है। यह रेत न केवल भारत तक पहुंचती है, बल्कि अमेज़न वर्षावन और कैरिबियन तक जाती है, जहां यह पोषक तत्वों की कमी वाली मिट्टी को समृद्ध करती है। समुद्र में यह धूल फाइटोप्लैंकटन के लिए खाद का काम करती है, जो समुद्री भोजन श्रृंखला का आधार है।
हालांकि, बढ़ती रेतीले तूफानों के नकारात्मक प्रभाव भी हैं। रेत के साथ आने वाले सूक्ष्मजीव संक्रमण फैला सकते हैं, जैसे मेनिन्जाइटिस। तूफान हवाई यातायात बाधित करते हैं, फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं और उपजाऊ मिट्टी को उड़ा लेते हैं। वैज्ञानिकों को चिंता है कि बढ़ती धूल बारिश कम कर सकती है, क्योंकि धूल के कणों के आसपास पानी के संघनन में देरी होती है।
संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन फॉर कंबैटिंग डेजर्टिफिकेशन (UNCCD) के अनुसार, दुनिया भर में धूल उत्सर्जन का कम से कम एक चौथाई हिस्सा मानवीय गतिविधियों — जैसे जंगलों की कटाई, अत्यधिक खेती और जमीन का दोहन — के कारण होता है। इन तूफानों से निपटने के लिए मिट्टी की सेहत बेहतर बनाना, उसे सूखने से बचाना और उर्वरता बढ़ाना जरूरी है।
तथ्य
- 30 मई 2026 को राजस्थान में 80 किमी/घंटा की रफ्तार से रेतीला बवंडर आया, जिसमें धूल का गुबार 100 फीट ऊंचाई तक दिखाई दिया।
- हर साल लगभग 2 अरब टन रेत और धूल वायुमंडल में 12 किलोमीटर तक की ऊंचाई पर पहुंचती है, जिसमें से आधा हिस्सा सहारा रेगिस्तान से आता है।
- सहारा की धूल अमेज़न वर्षावन और कैरिबियन तक पहुंचकर मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती है और समुद्री भोजन श्रृंखला को समृद्ध करती है।
- संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, दुनिया भर में धूल उत्सर्जन का कम से कम एक चौथाई हिस्सा मानवीय गतिविधियों के कारण होता है।
- रेतीले तूफान सांस और आंखों की समस्याएं पैदा कर सकते हैं, हवाई यातायात बाधित करते हैं और फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं।
- UNCCD के अनुसार, मिट्टी की बेहतर देखभाल, सूखे से बचाव और उर्वरता बढ़ाने से रेतीले तूफानों को कम किया जा सकता है।
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