कुलजीत कौर मरहास, एक भारतीय महिला वैज्ञानिक, जो उल्कापिंड विज्ञान में इतिहास रचते हुए मीटियोरिटिकल सोसाइटी की पहली भारतीय महिला फेलो बनीं।
कुलजीत कौर मरहास, एक भारतीय महिला वैज्ञानिक, जो उल्कापिंड विज्ञान में इतिहास रचते हुए मीटियोरिटिकल सोसाइटी की पहली भारतीय महिला फेलो बनीं।

ग्रह विज्ञान में यह उपलब्धि, इस विषय में रुचि रखने वाले किसी दोस्त के साथ समझने लायक संदर्भ देती है।

भारतीय वैज्ञानिक ने बनाया इतिहास कहानी का प्रवाह और मुख्य तथ्य

कुलजीत कौर मरहास, भारतीय वैज्ञानिक और फिजिकल रिसर्च लैबोरेटरी, अहमदाबाद में ग्रह विज्ञान विभाग की प्रोफेसर, ने इतिहास रचा है। वे मीटियोरिटिकल सोसाइटी की फेलो चुनी जाने वाली पहली भारतीय महिला बन गई हैं। यह सम्मान ग्रह विज्ञान और उल्कापिंड विज्ञान के क्षेत्र में दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित मान्यता मानी जाती है।

मरहास ने दशकों तक अंतरिक्षीय पदार्थों और उल्कापिंडों का अध्ययन किया है, विशेष रूप से एडवांस्ड आइसोटोपिक तकनीकों के जरिए सौरमंडल के विकास के बारे में जानकारी जुटाई है। उनके काम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है।

वे नैनो एसआईएमएस जैसी उन्नत तकनीकों की विशेषज्ञ हैं और पीआरएल में देश की सबसे उन्नत नैनो एसआईएमएस सुविधाओं में से एक के निर्माण में अहम भूमिका निभाई है। यह सुविधा भारतीय वैज्ञानिकों के लिए बड़ी उपलब्धि है।

इससे पहले केवल दो भारतीय वैज्ञानिकों—देवेन्द्र लाल और जेएन गोस्वामी—को यह सम्मान मिला था। मरहास के चयन से भारत की वैज्ञानिक उपस्थिति और महिला वैज्ञानिकों की भूमिका को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है।

तथ्य

  • कुलजीत कौर मरहास मीटियोरिटिकल सोसाइटी की फेलो चुनी जाने वाली पहली भारतीय महिला हैं।
  • मीटियोरिटिकल सोसाइटी का फेलोशिप ग्रह विज्ञान और उल्कापिंड विज्ञान का सबसे प्रतिष्ठित सम्मान माना जाता है।
  • मरहास पीआरएल, अहमदाबाद में ग्रह विज्ञान विभाग की प्रोफेसर हैं और अंतरिक्षीय पदार्थों के अध्ययन में विशेषज्ञ हैं।
  • उन्होंने पीआरएल में देश की सबसे उन्नत नैनो एसआईएमएस सुविधाओं में से एक की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
  • इससे पहले केवल दो भारतीय वैज्ञानिक—देवेन्द्र लाल और जेएन गोस्वामी—को यह सम्मान मिला था।

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