
प्रेशर कुकर में सुरक्षा क्रांति लाने वाले जगन्नाथन की कहानी, इस विषय को देख रहे किसी दोस्त के साथ समझने लायक संदर्भ देती है।

भारत के 'किचन किंग' की विरासत कहानी का प्रवाह और मुख्य तथ्य
टीटी जगन्नाथन ने 1970 में अपने परिवार के दिवालिया होते बिजनेस टीटीके प्रेस्टिज को संभाला, जो भारी कर्ज में डूबा था और बंद होने के कगार पर था। आईआईटी मद्रास और कॉर्नेल यूनिवर्सिटी की पृष्ठभूमि वाले जगन्नाथन ने इंजीनियरिंग कौशल के जरिए कंपनी को नई दिशा दी। उनके नेतृत्व में प्रेस्टिज ब्रांड ने भारतीय घरों में विश्वास की नई ऊंचाई हासिल की।
1980-90 के दशक में प्रेशर कुकर को लेकर ब्रांड की खराब सुरक्षा छवि थी। कई महिलाएं कुकर फटने से घायल हो चुकी थीं। उत्तर भारत के बाजारों में दुकानदारों ने सीधे कहा — 'आपके कुकर खतरनाक हैं, कौन खरीदेगा?' इस सवाल ने जगन्नाथन को चुनौती दी।
उन्होंने गैस्केट रिलीज सिस्टम (GRS) का आविष्कार किया, जिसमें रबर गैस्केट अतिरिक्त भाप को सुरक्षित रूप से बाहर निकाल देता था। यह डिजाइन सस्ता, क्रांतिकारी और अत्यंत प्रभावी था। तब से प्रेस्टिज का एक भी कुकर नहीं फटा। आज कंपनी का मार्केट कैप 7000 करोड़ से ज्यादा है और यह भारत की एकमात्र कंपनी है जो संपूर्ण इंडक्शन कुकिंग सॉल्यूशन ऑफर करती है।
तथ्य
- टीटी जगन्नाथन ने 1970 में दिवालिया होते परिवार बिजनेस टीटीके प्रेस्टिज की कमान संभाली।
- उन्होंने गैस्केट रिलीज सिस्टम (GRS) का आविष्कार किया, जिसने प्रेशर कुकर की सुरक्षा में क्रांति ला दी।
- उनके नेतृत्व में टीटीके प्रेस्टिज का मार्केट कैप 7000 करोड़ से अधिक हो गया।
- जगन्नाथन ने IIT मद्रास और कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से शिक्षा प्राप्त की।
- प्रेस्टिज आज भारत की एकमात्र कंपनी है जो संपूर्ण इंडक्शन कुकिंग सॉल्यूशन ऑफर करती है।
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