
ग्वादर बंदरगाह के भविष्य की दिशा पर नजर रखने वाले किसी दोस्त के लिए यह खबर उपयोगी संदर्भ देती है।

ईरान-पाकिस्तान के गलियारे में यूएई की रुकावट? कहानी का प्रवाह और मुख्य तथ्य
ईरान और पाकिस्तान के बीच चल रहे क्षेत्रीय व्यापार गलियारे को लेकर संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के साथ तनाव बढ़ गया है। ईरान-पाकिस्तान चैंबर ऑफ कॉमर्स ने आरोप लगाया है कि यूएई सक्रिय रूप से चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) में ईरान के शामिल होने में रुकावट डाल रहा है। ग्वादर बंदरगाह के उदय से यूएई के जेबेल अली पोर्ट की वैश्विक प्रतिष्ठा प्रभावित हो सकती है, जिससे आर्थिक प्रतिस्पर्धा तेज हो गई है।
eeरान चाबहार, जाहिदान और मीरजावेह के बीच रेल कनेक्टिविटी बनाकर CPEC से जुड़ने की कोशिश कर रहा है। इससे ईरान मध्य एशिया और चीन के बीच रणनीतिक व्यापार केंद्र बन सकता है। हालांकि, प्रोजेक्ट की प्रगति धीमी है और 2026 तक केवल 50 से 60 फीसदी पूरा होने की संभावना है।
यूएई के साथ तनाव के पीछे कई कारण हैं। यूएई में अमेरिकी सैन्य ठिकाने हैं, जिससे ईरान को आपत्ति है। इसके अलावा, पाकिस्तान के सऊदी अरब के साथ बढ़ते रिश्ते भी यूएई के साथ संबंधों को प्रभावित कर रहे हैं। CPEC में देरी के पीछे पाकिस्तान की अमेरिका के प्रति बढ़ती नजदीकी भी एक कारण बताई जा रही है।
तथ्य
- ईरान-पाकिस्तान चैंबर ऑफ कॉमर्स ने यूएई पर CPEC में ईरान के शामिल होने में रुकावट डालने का आरोप लगाया है।
- ग्वादर बंदरगाह के उदय से यूएई के जेबेल अली पोर्ट की वैश्विक अहमियत प्रभावित हो सकती है।
- ईरान चाबहार, जाहिदान और मीरजावेह के बीच रेल कनेक्टिविटी बनाकर CPEC से जुड़ने की योजना बना रहा है।
- CPEC प्रोजेक्ट 2030 तक पूरा होने की उम्मीद है, लेकिन 2026 तक केवल 50-60% पूरा होने का अनुमान है।
- यूएई में अमेरिकी सैन्य ठिकाने और पाकिस्तान की अमेरिका के प्रति नजदीकी CPEC में देरी के कारण बताए जा रहे हैं।
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