पाकिस्तान में दवाओं की कमी के कारण एक अस्पताल के बाहर लंबी कतार में खड़े मरीज, पृष्ठभूमि में खाली दवा रैक और चिंतित चेहरे।
पाकिस्तान में दवाओं की कमी के कारण एक अस्पताल के बाहर लंबी कतार में खड़े मरीज, पृष्ठभूमि में खाली दवा रैक और चिंतित चेहरे।

पाकिस्तान में दवाओं की कमी से इलाज महंगा हो गया है। अगर आपके आसपास कोई अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य मुद्दों पर नजर रख रहा हो, तो यह जानकारी उपयोगी हो सकती है।

पाकिस्तान में दवाओं की किल्लत कहानी का प्रवाह और मुख्य तथ्य

पाकिस्तान में चल रहे आर्थिक और भू-राजनीतिक तनावों के बीच स्वास्थ्य सेवाएं संकट में हैं। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास शिपिंग मार्गों को प्रभावित किया है, जिससे दवाओं के कच्चे माल की आपूर्ति में देरी और लागत में वृद्धि हुई है। पाकिस्तान दवाओं और उनके घटकों के लिए आयात पर अत्यधिक निर्भर है, जिसके कारण यह संकट गहरा गया है।

बड़े शहरों जैसे कराची, लाहौर और इस्लामाबाद में जरूरी दवाओं की कमी दर्ज की गई है, खासकर डायबिटीज, हृदय रोग और कैंसर के उपचार से जुड़ी दवाओं में। 2023 से लगातार कीमतों में बढ़ोतरी हुई है, जिसमें 2024 में लगभग 50% और 2025 में 30-40% की वृद्धि हुई।

इसके अलावा, शहबाज़ शरीफ सरकार ने दवा उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल पर 18% जीएसटी लगाने का फैसला किया, जिससे दवाओं की लागत और बढ़ गई। इस संयुक्त दबाव ने आम नागरिकों के लिए इलाज कराना लगभग असंभव बना दिया है। अभी तक सरकार की ओर से इस संकट को दूर करने के लिए कोई ठोस कदम सामने नहीं आया है।

तथ्य

  • ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के कारण हॉर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास शिपिंग प्रभावित हुई है
  • पाकिस्तान दवाओं और कच्चे माल के लिए आयात पर निर्भर है, जिससे आपूर्ति में कमी आई
  • 2024 में जरूरी दवाओं की कीमतों में लगभग 50% की वृद्धि हुई थी
  • 2025 में दवाओं की कीमतों में फिर 30-40% की बढ़ोतरी हुई
  • शहबाज़ शरीफ सरकार ने दवा उत्पादन के कच्चे माल पर 18% जीएसटी लगाया
  • कराची, लाहौर और इस्लामाबाद सहित बड़े शहरों में दवाओं की कमी दर्ज की गई

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