
युद्ध के लंबने से तेल और खाद्यान्न की कीमतें बढ़ सकती हैं। अगर आपके आसपास कोई निवेश या वैश्विक बाजार पर नजर रख रहा है, तो यह संदर्भ उपयोगी लग सकता है।

IMF चेतावनी: युद्ध लंबित रहा तो अर्थव्यवस्था आपातकाल में कहानी का प्रवाह और मुख्य तथ्य
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने चेतावनी जारी की है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष 2027 तक जारी रहता है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था गहरे संकट में पड़ सकती है। IMF प्रमुख क्रिस्टलीना जॉर्जीवा के अनुसार, इस संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमत 125 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है, जिससे महंगाई बढ़कर 5.4 फीसदी तक हो सकती है। वैश्विक आर्थिक वृद्धि दर घटकर 2.5 फीसदी रह सकती है।
होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने का खतरा भी बढ़ रहा है, जहां से दुनिया की तेल आपूर्ति का लगभग 20 फीसदी हिस्सा गुजरता है। शेवरॉन के सीईओ माइक विर्थ के अनुसार, इसके बंद होने से तेल की भौतिक कमी दिखाई देगी और एशियाई अर्थव्यवस्थाएं सबसे पहले प्रभावित होंगी।
IMF ने यह भी बताया कि खाद्यान्न उत्पादन पर भी असर पड़ रहा है। खाद की कीमतें पहले ही 30 से 40 फीसदी बढ़ चुकी हैं, जिससे खाद्य वस्तुओं के दाम 3 से 6 फीसदी तक बढ़ सकते हैं। बहुत से नीति निर्माता अभी भी इस संकट को अल्पकालिक मान रहे हैं, जिससे मांग लगातार ऊंची बनी हुई है।
तथ्य
- IMF प्रमुख क्रिस्टलीना जॉर्जीवा ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका-ईरान युद्ध 2027 तक चला, तो तेल की कीमत 125 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है
- IMF के अनुसार, वैश्विक आर्थिक वृद्धि दर 2.5% तक गिर सकती है और महंगाई 5.4% हो सकती है
- होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया की तेल आपूर्ति का लगभग 20% हिस्सा गुजरता है
- खाद की कीमतें पहले ही 30 से 40% तक बढ़ चुकी हैं, जिससे खाद्य वस्तुओं के दाम 3 से 6% तक बढ़ सकते हैं
- IMF ने कहा कि बहुत से नीति निर्माता अभी भी इस संकट को अल्पकालिक मान रहे हैं
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