एक डिजिटल आर्टवर्क जहां एक अमेरिकी गैस स्टेशन के टैंक मॉनिटरिंग सिस्टम पर ईरानी झंडे के पीछे से हैकर्स डेटा में घुसपैठ कर रहे हैं, पृष्ठभूमि में साइबर थ्रेट अलर्ट चमक रहा है।
एक डिजिटल आर्टवर्क जहां एक अमेरिकी गैस स्टेशन के टैंक मॉनिटरिंग सिस्टम पर ईरानी झंडे के पीछे से हैकर्स डेटा में घुसपैठ कर रहे हैं, पृष्ठभूमि में साइबर थ्रेट अलर्ट चमक रहा है।

ईरान से जुड़े हैकर्स द्वारा गैस स्टेशनों के टैंक सिस्टम में घुसपैठ की कोशिश, इस विषय को देख रहे किसी सहकर्मी या दोस्त के साथ समझने लायक संदर्भ देती है।

ईरानी हैकर्स का अमेरिकी गैस स्टेशनों पर निशाना कहानी का प्रवाह और मुख्य तथ्य

अमेरिकी अधिकारियों को शक है कि ईरान से जुड़े हैकर्स ने अमेरिका के कई गैस स्टेशनों में इस्तेमाल होने वाले ऑटोमैटिक टैंक गेज (ATG) सिस्टम में सेंध लगाई है। ये सिस्टम फ्यूल टैंक में तेल की मात्रा की निगरानी करते हैं। हैकर्स ने उन सिस्टम का फायदा उठाया जो बिना पासवर्ड के इंटरनेट से जुड़े थे। कुछ स्थानों पर टैंक स्क्रीन के डेटा में छेड़छाड़ की गई, हालांकि वास्तविक ईंधन स्तर में कोई बदलाव नहीं हुआ। अभी तक कोई भौतिक क्षति या गैस लीक नहीं हुई है।

हालांकि, अमेरिकी एजेंसियां चिंतित हैं कि अगर हैकर्स को पूरा नियंत्रण मिल जाता, तो वे गैस लीक जैसी खतरनाक स्थिति को छिपा सकते थे। इसलिए इस घटना को राष्ट्रीय सुरक्षा के जोखिम के रूप में देखा जा रहा है। ईरानी साइबर समूह पहले भी अमेरिकी तेल, गैस और जल आपूर्ति प्रणालियों को निशाना बना चुके हैं।

2023 में हमास-इजरायल युद्ध के बाद ईरान समर्थित हैकर्स पर पानी की सुविधाओं पर हमले का आरोप लगाया गया था। फरवरी 2026 में ईरान-अमेरिका तनाव के बाद, ईरानी हैकर्स ने अमेरिकी तेल और गैस साइट्स, जल आपूर्ति व्यवस्था और चिकित्सा कंपनियों को निशाना बनाया। यहां तक कि एफबीआई डायरेक्टर काश पटेल के पुराने ईमेल भी लीक किए गए। साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान अब अधिक आक्रामक और अप्रत्याशित हो गया है और एआई व फर्जी ऑनलाइन पहचान का उपयोग कर तेजी से हमले बढ़ा रहा है।

तथ्य

  • अमेरिकी अधिकारियों को शक है कि ईरान से जुड़े हैकर्स ने गैस स्टेशनों के ऑटोमैटिक टैंक गेज (ATG) सिस्टम में सेंध लगाई है।
  • हैकर्स ने बिना पासवर्ड वाले ATG सिस्टम का फायदा उठाया और कुछ स्थानों पर टैंक स्क्रीन के डेटा में छेड़छाड़ की।
  • अमेरिकी एजेंसियां चिंतित हैं कि अगर हैकर्स को पूरा नियंत्रण मिल जाता, तो वे गैस लीक जैसी खतरनाक स्थिति को छिपा सकते थे।
  • ईरानी साइबर समूह पहले भी अमेरिकी तेल, गैस और जल आपूर्ति प्रणालियों को निशाना बना चुके हैं।
  • 2023 में हमास-इजरायल युद्ध के बाद ईरान समर्थित हैकर्स पर पानी की सुविधाओं पर हमले का आरोप लगाया गया था।
  • फरवरी 2026 में ईरान-अमेरिका तनाव के बाद, ईरानी हैकर्स ने अमेरिकी तेल और गैस साइट्स, जल आपूर्ति व्यवस्था और चिकित्सा कंपनियों को निशाना बनाया।

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