एक एयरबेस पर छिपे ईरानी लड़ाकू विमानों की कलात्मक छवि, पाकिस्तानी झंडे के साथ, जबकि पृष्ठभूमि में शांति वार्ता के प्रतीक दिखाई दे रहे हैं।
एक एयरबेस पर छिपे ईरानी लड़ाकू विमानों की कलात्मक छवि, पाकिस्तानी झंडे के साथ, जबकि पृष्ठभूमि में शांति वार्ता के प्रतीक दिखाई दे रहे हैं।

अगर यह सच है, तो पाकिस्तान की मध्यस्थता भूमिका पर सवाल उठना लाजिमी है, इस बात को देख रहे किसी सहकर्मी के लिए यह संदर्भ जरूरी है।

पाकिस्तान ने ईरानी लड़ाकू विमानों को छुपाया? कहानी का प्रवाह और मुख्य तथ्य

अमेरिकी अधिकारियों के दावे में पाकिस्तान पर ईरानी लड़ाकू विमानों को अपने नूर खान एयर बेस पर छुपाने का आरोप है, जबकि वह अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की भूमिका निभा रहा था। यह घटना अप्रैल 2026 में तब हुई जब ट्रंप प्रशासन ने ईरान के साथ सीजफायर की घोषणा की थी। अमेरिकी मीडिया CBS न्यूज ने दो गुमनाम अधिकारियों के हवाले से इस जानकारी को साझा किया।

इस बीच, अफगानिस्तान में भी ईरानी सिविल विमान के उतरने की खबर है, हालांकि तालिबान प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने ईरानी विमानों की मौजूदगी से इनकार किया है। पाकिस्तानी अधिकारियों ने भी इन दावों को खारिज कर दिया है।

अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने इस मामले पर चिंता जताते हुए कहा कि अगर यह सच है, तो पाकिस्तान की मध्यस्थता भूमिका की पुनर्समीक्षा की जानी चाहिए। उन्होंने पाकिस्तानी रक्षा अधिकारियों के इजरायल के खिलाफ पुराने बयानों को भी संदर्भ में रखा।

तथ्य

  • अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, अप्रैल 2026 में ईरान ने अपने लड़ाकू विमान पाकिस्तान के नूर खान एयर बेस पर भेजे थे।
  • यह कदम अमेरिकी हवाई हमलों से बचने के लिए उठाया गया हो सकता है, जबकि पाकिस्तान मध्यस्थता की भूमिका निभा रहा था।
  • पाकिस्तानी अधिकारियों ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है।
  • अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने पाकिस्तान की मध्यस्थता भूमिका की पुनर्समीक्षा की मांग की है।
  • तालिबान प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने अफगानिस्तान में ईरानी विमानों की मौजूदगी से इनकार किया है।

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