
अमेरिका के लिए पाकिस्तान अब स्थायी सहयोगी नहीं, बल्कि रणनीतिक जरूरत का देश बन गया है, यह संदर्भ इस विषय पर नजर रखने वाले किसी सहकर्मी के लिए उपयोगी हो सकता है।

अमेरिका नहीं मानेगा मुनीर के वादे कहानी का प्रवाह और मुख्य तथ्य
अमेरिका और पाकिस्तान के संबंधों में गहराई आई है, जहां पेंटागन के पूर्व अधिकारी माइकल रुबिन ने स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान पर भरोसा नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार, अमेरिका ने पाकिस्तान को हमेशा केवल रणनीतिक जरूरत के तौर पर देखा है, न कि स्थायी सहयोगी के रूप में।
रुबिन ने सोशल मीडिया पर टिप्पणी करते हुए कहा कि ट्रंप प्रशासन के बाद भी अगली सरकार—चाहे वह डेमोक्रेट हो या रिपब्लिकन—पाकिस्तान पर भरोसे के मुद्दे पर एक समान दृष्टिकोण रखेगी। इसलिए अमेरिका मुनीर से किए गए किसी वादे को पूरा करने के लिए खुद को बाध्य नहीं मानेगा।
पाकिस्तान के साथ संबंधों में तनाव 9/11 के बाद से गहरा गया था, जब अमेरिका को संदेह था कि ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान में पनाह दी गई थी। 2011 में अमेरिका ने एबट्टाबाद में गुप्त ऑपरेशन के जरिए उसे मार गिराया, जिसके बाद संबंध और खराब हुए।
2006 के बाद से कोई अमेरिकी राष्ट्रपति पाकिस्तान नहीं गया। 2011 के बाद शीर्ष अधिकारी भी नहीं आए, लेकिन अप्रैल 2026 में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ईरान के साथ जारी तनाव के बीच समझौता वार्ता के लिए इस्लामाबाद पहुंचे थे, जो संबंधों में बदलाव का संकेत था।
तथ्य
- पेंटागन के पूर्व अधिकारी माइकल रुबिन ने कहा कि पाकिस्तान पर भरोसा नहीं किया जा सकता।
- अमेरिका मुनीर से किए गए वादे को पूरा करने के लिए खुद को बाध्य नहीं मानेगा।
- ट्रंप प्रशासन के बाद भी अगली सरकार पाकिस्तान पर भरोसे के मुद्दे पर एक रुख रखेगी।
- 2011 में अमेरिका ने पाकिस्तान में ओसामा बिन लादेन को मार गिराया था।
- 2006 के बाद से कोई अमेरिकी राष्ट्रपति पाकिस्तान नहीं गया।
- अप्रैल 2026 में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस्लामाबाद पहुंचे थे।
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