
मिराज 2000 की भूमिका अब भी भारत की परमाणु रणनीति में महत्वपूर्ण है, इस बदलाव को देख रहे किसी रक्षा विश्लेषक के साथ समझने लायक संदर्भ देती है।

यूएई ने मिराज 2000 से ईरान में तबाही कहानी का प्रवाह और मुख्य तथ्य
संयुक्त अरब अमीरात ने अप्रैल 2026 में ईरान के लावन द्वीप पर स्थित एक तेल रिफाइनरी पर मिराज 2000-9 लड़ाकू विमान से हमला किया, जिसकी पुष्टि वाल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में हुई। इस हमले के बाद ईरान ने UAE और कुवैत पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। हालांकि दोनों देशों ने आधिकारिक तौर पर टिप्पणी नहीं की, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि यह इजरायल के साथ समन्वय में किया गया हो सकता है।
मिराज 2000-9, फ्रांस की डसॉल्ट द्वारा डिज़ाइन किया गया चौथी पीढ़ी का मल्टीरोल फाइटर जेट है, जो UAE के लिए विशेष रूप से अपग्रेड किया गया था। इसे मिराज लाइन का 'पीक' माना जाता है, जिसमें उन्नत एवियोनिक्स, सटीक हमले और गहरी घुसपैठ की क्षमता है। यही तकनीक भारतीय वायुसेना में भी मौजूद है।
भारत ने ग्वालियर के महाराजपुर एयरफोर्स स्टेशन पर तैनात मिराज 2000 को परमाणु हथियार गिराने की भूमिका सौंपी थी। 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान इन्हें परमाणु बमों से लैस करने की तैयारी पूरी की गई थी। अब राफेल विमान इस जिम्मेदारी को संभाल रहे हैं। यूक्रेन ने भी 2025 में मिराज 2000-5 प्राप्त किए और रूसी हमलों के खिलाफ इनका उपयोग किया।
तथ्य
- संयुक्त अरब अमीरात ने अप्रैल 2026 में मिराज 2000-9 लड़ाकू विमान से ईरान के लावन द्वीप पर तेल रिफाइनरी पर हमला किया।
- ईरान ने हमले के बाद UAE और कुवैत पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।
- भारत ने ग्वालियर के महाराजपुर एयरफोर्स स्टेशन पर तैनात मिराज 2000 को परमाणु हथियार गिराने की भूमिका सौंपी थी।
- मिराज 2000-9 को फ्रांस की डसॉल्ट ने UAE के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किया था।
- यूक्रेन ने 2025 में मिराज 2000-5 प्राप्त किए और रूसी हमलों के खिलाफ उनका उपयोग किया।
Canto का विज़ुअल न्यूज़ एक्सप्लेनर। उत्पादन में AI टूल सहायता कर सकते हैं। संपादकीय नीति





