
होर्मुज से जुड़े देशों के लिए यह अवरोध गंभीर संकेत है, इस विषय पर नजर रखने वाले किसी सहकर्मी के साथ समझने लायक संदर्भ देता है।

होर्मुज जलडमरूमार्ग में 24 घंटे तक जहाजों का संचार ठप कहानी का प्रवाह और मुख्य तथ्य
होर्मुज जलडमरूमार्ग, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, 24 घंटे तक पूरी तरह अवरुद्ध रहा। अमेरिका और ईरान के बीच गुरुवार रात हुए मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद तनाव चरम पर पहुंच गया, जिसके कारण कोई भी जहाज सुरक्षित माने बिना इस मार्ग को पार नहीं करना चाहता था। इस ड्राइन के दौरान रोजाना 130 से अधिक जहाजों के गुजरने वाला यह मार्ग पूरी तरह खाली रहा।
कतर का एलएनजी टैंकर 'अल खरैतियात', जो मार्शल आइलैंड का झंडा लहराता है, होर्मुज की ओर बढ़ा, लेकिन अभी तक सफलतापूर्वक पार नहीं कर पाया है। इस टैंकर पर 2,11,986 घन मीटर एलएनजी लदा हुआ है और यह पाकिस्तान के पोर्ट कासिम की ओर जा रहा है। अगर यह सफलतापूर्वक गुजरता है, तो यह ईरान के साथ युद्ध शुरू होने के बाद कतर के टैंकरों का पहला सफल ट्रांजिट होगा।
इस बीच, ईरान ने कतर के दो जहाजों, अल दायन और रशीदा को छह अप्रैल से बिना कारण बताए रोक रखा है। खाड़ी देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ईरान के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर दबाव बढ़ाया है। कतर, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कुवैत और अमेरिका मिलकर एक प्रस्ताव तैयार कर रहे हैं, जिसमें ईरान पर नए प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है।
तथ्य
- अमेरिका और ईरान के बीच गुरुवार रात मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद होर्मुज जलडमरूमार्ग में 24 घंटे तक कोई जहाज नहीं गुजरा।
- होर्मुज से रोजाना 130 से अधिक जहाज गुजरते थे, जो अब तक पूरी तरह ठप है।
- ईरान ने कतर के दो जहाजों, अल दायन और रशीदा को 6 अप्रैल से बिना कारण रोक रखा है।
- कतर का एलएनजी टैंकर 'अल खरैतियात' होर्मुज की ओर बढ़ा, जिस पर मार्शल आइलैंड का झंडा है।
- कतर, बहरीन, यूएई, सऊदी अरब, कुवैत और अमेरिका ईरान के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र में प्रतिबंध प्रस्ताव तैयार कर रहे हैं।
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