
इथेनॉल और पानी के मिश्रण से चलने वाला यह स्टोव ऊर्जा लागत में बचत का ठोस विकल्प हो सकता है, इस दिशा में आगे के विकास को देख रहे किसी सहकर्मी के लिए यह संदर्भ उपयोगी है।

इथेनॉल चूल्हा: एलपीजी से सस्ता और स्वदेशी विकल्प कहानी का प्रवाह और मुख्य तथ्य
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने एक नए स्वदेशी एथेनॉल-आधारित कुकिंग स्टोव का अनावरण किया है, जो वाणिज्यिक एलपीजी की तुलना में कम लागत वाला विकल्प प्रदान करता है। इस तकनीक में पानी में 7% इथेनॉल मिलाकर खाना पकाने के लिए उपयुक्त लौ उत्पन्न की जाती है। यह नवाचार भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लक्ष्य के अनुरूप है, जहां देश अपनी कच्चे तेल की आवश्यकताओं का लगभग 87% आयात करता है।
गडकरी ने इसे एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के विस्तार के रूप में पेश किया, जिसके तहत पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण का स्तर 2014 के 1.53% से बढ़कर 2025 तक 20% होने का लक्ष्य है। यह नई चूल्हा तकनीक घरेलू खाना पकाने के क्षेत्र में एथेनॉल के उपयोग को बढ़ावा दे सकती है, जहां लाखों परिवार अभी भी एलपीजी सिलेंडरों पर निर्भर हैं।
सरकार का लक्ष्य न केवल ऊर्जा लागत कम करना है, बल्कि कृषि अपशिष्ट से एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देकर किसानों को लाभ पहुंचाना भी है। गडकरी ने युवाओं में विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए 40 करोड़ रुपए की परियोजना पर भी काम चल रहा बताया। अगर इस तकनीक को सफलतापूर्वक व्यापारीकृत किया गया, तो यह भारत के स्वच्छ ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत कर सकता है।
तथ्य
- केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने एथेनॉल-आधारित स्वदेशी कुकिंग स्टोव तकनीक का अनावरण किया।
- इस स्टोव में पानी में 7% इथेनॉल मिलाकर लौ उत्पन्न की जाती है, जो वाणिज्यिक एलपीजी से सस्ती है।
- भारत अपनी कच्चे तेल की आवश्यकताओं का लगभग 87% आयात करता है।
- पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य 2025 तक 20% तक पहुंचाने का है।
- गडकरी ने युवाओं में विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए 40 करोड़ रुपए की परियोजना की घोषणा की।
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