
ईंधन और सोने की कीमतों में तेजी, एक ऐसा बदलाव जो घरेलू बजट बनाने वाले किसी दोस्त के लिए भी अहम हो सकता है।

थोक महंगाई में 42 महीने का रिकॉर्ड कहानी का प्रवाह और मुख्य तथ्य
अप्रैल 2026 में भारत की थोक महंगाई दर (WPI) 8.3 फीसदी तक पहुंच गई, जो पिछले 42 महीनों में सबसे ऊंचा स्तर है। मार्च में यह दर 3.88 फीसदी थी। वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 50 फीसदी की बढ़ोतरी के चलते ईंधन और बिजली श्रेणी में महंगाई 24.71 फीसदी हो गई। कच्चे पेट्रोलियम में यह दर 88.06 फीसदी रही, जो अक्टूबर 2021 के बाद सबसे अधिक है। पेट्रोल की थोक महंगाई 32.40 फीसदी और डीजल में 25.19 फीसदी रही।
इसके अलावा, मुंबई में सीएनजी के दाम 2 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़कर 84 रुपये प्रति किलो हो गए। सरकार ने सोने के आयात पर नियंत्रण बढ़ाते हुए एडवांस ऑथराइजेशन स्कीम के तहत ड्यूटी-फ्री आयात की सीमा 100 किलो तक सीमित कर दी। विशेषज्ञों का मानना है कि मई 2026 में WPI महंगाई 9 फीसदी तक पहुंच सकती है।
हालांकि, सरकार ने पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी के खुदरा दाम स्थिर रखे हैं, जिससे आम उपभोक्ताओं पर तत्काल बोझ नहीं पड़ा है। बार्कलेज के अनुसार, मई में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 5 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी हो सकती है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की मौद्रिक नीति समिति फिलहाल ब्याज दरों में बदलाव से बच सकती है।
तथ्य
- अप्रैल 2026 में भारत की थोक महंगाई दर (WPI) 8.3% रही, जो पिछले 42 महीनों में सबसे ऊंचा स्तर है।
- ईंधन और बिजली श्रेणी में महंगाई 24.71% तक पहुंच गई, जबकि कच्चे पेट्रोलियम में यह 88.06% रही।
- मुंबई में सीएनजी के दाम 2 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़कर 84 रुपये प्रति किलो हो गए।
- सरकार ने एडवांस ऑथराइजेशन स्कीम के तहत ड्यूटी-फ्री सोने के आयात की सीमा 100 किलो तक सीमित कर दी।
- बार्कलेज के अनुसार, मई 2026 में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 5 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी हो सकती है।
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