
अब यह समझ में आया कि नीले विस्फोट कैसे बनते हैं, खगोल विज्ञान में रुचि रखने वाले किसी दोस्त के साथ यह संदर्भ बांटने लायक है।

ब्रह्मांड में नीले विस्फोट का रहस्य उजागर कहानी का प्रवाह और मुख्य तथ्य
हाल ही में वैज्ञानिकों ने ब्रह्मांड में होने वाले रहस्यमय नीले प्रकाश विस्फोटों की उत्पत्ति को समझने में बड़ी सफलता हासिल की है। इन विस्फोटों को 'तेज़, चमकीला, नीला क्षणिक प्रकाशीय घटना' (एलएफबीओटी) कहा जाता है, जो कुछ दिनों में चमकते हैं और फीके पड़ जाते हैं। इनकी उत्पत्ति लंबे समय से खगोलविदों के लिए एक पहेली बनी हुई थी।
अब हार्वर्ड विश्वविद्यालय के खगोल भौतिकी केंद्र की डॉ. आन्या नुगेंट की अगुवाई में एक शोध टीम ने इस रहस्य को सुलझाया है। उनके अनुसार, एलएफबीओटी एक 'ज़ोंबी' तारे (न्यूट्रॉन तारा या ब्लैक होल) और एक वुल्फ-रेएट तारे के बीच टकराव के परिणामस्वरूप उत्पन्न होते हैं। वुल्फ-रेएट तारे विशाल तारों के अंतिम चरण के तीव्र उत्सर्जन होते हैं।
शोध के अनुसार, एक विशाल तारा दूसरे से पदार्थ खींचता है और उसे वुल्फ-रेएट तारा बना देता है। फिर वह स्वयं सुपरनोवा बन जाता है और एक न्यूट्रॉन तारा या ब्लैक होल में बदल जाता है — जिसे 'ज़ोंबी' कहा जाता है। अंत में, यह ज़ोंबी तारा वुल्फ-रेएट तारे को निगल लेता है, जिससे नीला विस्फोट उत्पन्न होता है। यह घटना उन आकाशगंगाओं में अधिक देखी गई है जहां छोटे, विकसित तारे प्रचलित हैं।
तथ्य
- 2018 में पहली बार 'तेज़, चमकीला, नीला क्षणिक प्रकाशीय घटना' (एलएफबीओटी) का पता लगाया गया।
- हार्वर्ड विश्वविद्यालय की डॉ. आन्या नुगेंट की टीम ने एलएफबीओटी के स्रोत की व्याख्या की।
- एलएफबीओटी एक 'ज़ोंबी' तारे और वुल्फ-रेएट तारे के टकराव के परिणामस्वरूप उत्पन्न होते हैं।
- वुल्फ-रेएट तारे विशाल तारों के अंतिम चरण के तीव्र उत्सर्जन होते हैं।
- एलएफबीओटी का प्रकाश कुछ दिनों में चरम पर पहुंचकर फीका पड़ जाता है।
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