
मंगल के पास से गुजरते हुए गति पकड़ना, इस विज्ञान यात्रा को देख रहे किसी दोस्त के साथ समझने लायक संदर्भ देता है।

नासा का साइकी मिशन मंगल के बाद अब धातु एस्ट्रॉयड की ओर कहानी का प्रवाह और मुख्य तथ्य
नासा का साइकी मिशन अब अपने असली लक्ष्य, धातु से भरे एस्ट्रॉयड 16 साइकी की ओर बढ़ रहा है। 15 मई 2026 को स्पेसक्राफ्ट ने मंगल ग्रह के पास से फ्लाईबाई पूरी की, जिससे उसे गुरुत्वाकर्षण सहायता मिली और रफ्तार में 1,600 किलोमीटर प्रति घंटा की वृद्धि हुई। इस दौरान उसने मंगल के दक्षिणी ध्रुव, वैलेस मेरिनेरिस क्षेत्र और बड़े क्रेटर की तस्वीरें भी कैप्चर कीं।
मिशन के दौरान वैज्ञानिक उपकरणों का परीक्षण और कैलिब्रेशन भी किया गया। स्पेसक्राफ्ट में मल्टीस्पेक्ट्रल इमेजर, मैग्नेटोमीटर, गामा-रे व न्यूट्रॉन स्पेक्ट्रोमीटर और डीप स्पेस ऑप्टिकल कम्युनिकेशन सिस्टम शामिल हैं। यह लेजर आधारित संचार तकनीक वर्तमान प्रणाली की तुलना में लगभग 100 गुना तेज डेटा संचरण सक्षम कर सकती है।
साइकी मिशन मई 2029 में एस्ट्रॉयड 16 साइकी के पास पहुंचना शुरू करेगा और जुलाई 2029 तक उसकी कक्षा में प्रवेश कर जाएगा। मिशन के दो साल के दौरान स्पेसक्राफ्ट अलग-अलग ऊंचाइयों से एस्ट्रॉयड का अध्ययन करेगा। वैज्ञानिक यह जानने की कोशिश करेंगे कि क्या यह एस्ट्रॉयड किसी टूटे छोटे ग्रह का धात्विक कोर है या सौरमंडल के प्रारंभिक दौर का अनोखा पदार्थ।
तथ्य
- नासा का साइकी मिशन 15 मई 2026 को मंगल ग्रह के पास से फ्लाईबाई करके आगे बढ़ा।
- मंगल की गुरुत्वाकर्षण शक्ति से स्पेसक्राफ्ट की रफ्तार में 1,600 किमी/घंटा की वृद्धि हुई।
- मिशन मई 2029 में एस्ट्रॉयड 16 साइकी के पास पहुंचना शुरू करेगा और जुलाई 2029 तक उसकी कक्षा में प्रवेश करेगा।
- स्पेसक्राफ्ट में डीप स्पेस ऑप्टिकल कम्युनिकेशन सिस्टम है, जो डेटा संचरण को 100 गुना तेज कर सकता है।
- मिशन का उद्देश्य यह जानना है कि क्या एस्ट्रॉयड 16 साइकी किसी टूटे ग्रह का धात्विक कोर है।
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