एक रोबोट और एक कार्यकर्ता आमने-सामने खड़े हैं, रोबोट के हाथ में बिजली बिल है जिस पर '4200 करोड़' लिखा है, जबकि कार्यकर्ता मुस्कुरा रहा है।
एक रोबोट और एक कार्यकर्ता आमने-सामने खड़े हैं, रोबोट के हाथ में बिजली बिल है जिस पर '4200 करोड़' लिखा है, जबकि कार्यकर्ता मुस्कुरा रहा है।

AI अभी भी काम करता है, लेकिन इंसान अब भी सस्ता और विश्वसनीय विकल्प है, इस बदलाव को देख रहे किसी सहकर्मी के लिए यह संदर्भ उपयोगी है।

AI चलाना इंसानों से महंगा कहानी का प्रवाह और मुख्य तथ्य

पिछले दो सालों में एआई को लेकर उम्मीदों का दौर था, लेकिन 2026 में टेक दुनिया के सामने एक नई चुनौती है — एआई की बढ़ती लागत। गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, उबर और OpenAI जैसी कंपनियां स्वीकार कर रही हैं कि AI मॉडल्स के संचालन में इंफरेंस कॉस्ट इतना अधिक है कि कई ने महंगे लाइसेंस रद्द कर दिए हैं। कुछ कंपनियों को केवल कुछ महीनों में 500 मिलियन डॉलर के बिल आए हैं, जबकि उबर का AI सब्सक्रिप्शन बजट से पहले ही समाप्त हो गया।

इसके पीछे मुख्य कारण एआई के भारी इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत है — हजारों GPU चिप्स, डेटा सेंटर और लगातार बिजली की खपत। यही वजह है कि कंपनियां अब मुफ्त AI सुविधाओं को सीमित कर रही हैं और प्रीमियम सब्सक्रिप्शन पेश कर रही हैं। वहीं, नेशनल ब्यूरो ऑफ इकोनॉमिक रिसर्च की एक रिपोर्ट के मुताबिक 90% कंपनियों ने माना कि AI ने उनकी उत्पादकता या रोजगार पर अभी तक कोई बड़ा असर नहीं दिखाया है।

इस बीच, एआई के नाम पर छंटनी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। OpenAI के सैम ऑल्टमैन और एनवीडिया के जेनसन हुआंग ने कहा है कि कई कंपनियां अपनी छंटनी को AI के नाम पर तर्कसंगत बना रही हैं। अमेरिका में छात्रों और कर्मचारियों के बीच AI के प्रति विरोध भी बढ़ रहा है। कई अर्थशास्त्री अब AI निवेश को डॉट कॉम बबल जैसा बता रहे हैं, जहां अत्यधिक उम्मीदों के बाद बाजार सुधार के दौर से गुजरा था।

तथ्य

  • 2026 में माइक्रोसॉफ्ट ने महंगा होने के कारण Claude के कई लाइसेंस रद्द कर दिए।
  • कुछ कंपनियों को केवल कुछ महीनों में 500 मिलियन डॉलर का AI बिल आया।
  • उबर का AI सब्सक्रिप्शन बजट समय से पहले ही समाप्त हो गया।
  • नेशनल ब्यूरो ऑफ इकोनॉमिक रिसर्च की रिपोर्ट: 90% कंपनियों ने AI का उत्पादकता पर कोई बड़ा असर नहीं देखा।
  • OpenAI के सैम ऑल्टमैन ने माना कि 'नौकरी खत्म होने' वाली स्थिति अभी तक नहीं आई है।
  • एनवीडिया के जेनसन हुआंग ने कहा कि कई कंपनियां छंटनी को AI के नाम पर तर्कसंगत बना रही हैं।

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