एक एस्ट्रोनॉट ओरियन स्पेसक्राफ्ट के कॉकपिट में तारों को देखते हुए, पृष्ठभूमि में चंद्रमा और आकाशगंगा के साथ
एक एस्ट्रोनॉट ओरियन स्पेसक्राफ्ट के कॉकपिट में तारों को देखते हुए, पृष्ठभूमि में चंद्रमा और आकाशगंगा के साथ

तारों पर आधारित नेविगेशन अब भी जरूरी है, इस विषय में रुचि रखने वाले किसी सहकर्मी के लिए यह संदर्भ उपयोगी हो सकता है।

अंतरिक्ष में रास्ता कैसे ढूंढते हैं एस्ट्रोनॉट्स? कहानी का प्रवाह और मुख्य तथ्य

अंतरिक्ष में रास्ता तय करना एक जटिल प्रक्रिया है, क्योंकि वहां कोई लैंडमार्क, सड़क या निशान नहीं होते। एस्ट्रोनॉट्स इसके लिए दो मुख्य तरीकों का उपयोग करते हैं: पृथ्वी पर स्थित मिशन कंट्रोल से मिलने वाली सहायता और तारों का उपयोग करके स्वयं अपनी स्थिति निर्धारित करना। मिशन कंट्रोल अपने ट्रैकिंग सिस्टम के जरिए स्पेसक्राफ्ट की स्थिति, गति और दिशा के बारे में लगातार जानकारी भेजता है।

d दूसरी ओर, स्पेसक्राफ्ट में लगे विशेष सिस्टम तारों की तस्वीरें लेकर उनकी स्थिति के आधार पर गणना करते हैं। ये सिस्टम चंद्रमा की स्थिति और छाया का भी विश्लेषण करते हैं। तारीख और समय के साथ इन आंकड़ों को जोड़कर स्पेसक्राफ्ट की सटीक स्थिति और गति का पता चलता है।

नासा के आर्टेमिस-2 मिशन के एस्ट्रोनॉट जेरेमी हैनसेन ने बताया कि जबकि स्पेसक्राफ्ट आमतौर पर स्वचालित मोड में उड़ता है, एस्ट्रोनॉट्स आपातकाल में इसे मैन्युअल रूप से भी नियंत्रित कर सकते हैं। तारों का उपयोग उन्हें मिशन कंट्रोल के निर्देशों के अलावा स्वतंत्र रूप से दिशा निर्धारित करने में सक्षम बनाता है। यह तकनीक समुद्री नौसंचालन में तारों के उपयोग के सिद्धांत पर आधारित है, जिसे अब आधुनिक उपकरणों के साथ अंतरिक्ष में लागू किया जा रहा है।

तथ्य

  • एस्ट्रोनॉट्स अपनी स्थिति जानने के लिए पृथ्वी के मिशन कंट्रोल और तारों दोनों पर निर्भर करते हैं
  • स्पेसक्राफ्ट में लगे सिस्टम तारों की तस्वीरें लेकर उनके आधार पर स्थिति की गणना करते हैं
  • जेरेमी हैनसेन, नासा के आर्टेमिस-2 मिशन के एस्ट्रोनॉट, ने तारों के उपयोग के बारे में बताया
  • तारों का उपयोग एस्ट्रोनॉट्स को मैन्युअल रूप से दिशा निर्धारित करने में सक्षम बनाता है
  • यह नेविगेशन तकनीक समुद्री नौसंचालन के पारंपरिक सिद्धांत पर आधारित है

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