एक नक्शे पर रूस से चीन तक फैली पावर ऑफ साइबेरिया-2 पाइपलाइन की कलात्मक तस्वीर, जिसमें गैस के प्रवाह को दिखाया गया है।
एक नक्शे पर रूस से चीन तक फैली पावर ऑफ साइबेरिया-2 पाइपलाइन की कलात्मक तस्वीर, जिसमें गैस के प्रवाह को दिखाया गया है।

रूस से सालाना 50 अरब क्यूबिक मीटर गैस की आपूर्ति, उत्तरी चीन के लिए यह समझौता लंबे समय तक अहम रहेगा।

पुतिन का बड़ा कदम: चीन के साथ गैस समझौता कहानी का प्रवाह और मुख्य तथ्य

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने चीन के साथ एक ऐतिहासिक ऊर्जा समझौते की घोषणा की है, जिसके तहत 'पावर ऑफ साइबेरिया-2' नामक नई पाइपलाइन के जरिए रूस, चीन को सालाना 50 अरब क्यूबिक मीटर प्राकृतिक गैस की आपूर्ति करेगा। यह 2,600 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन रूस के यामल प्रायद्वीप से शुरू होकर मंगोलिया के रास्ते उत्तरी चीन तक जाएगी। यह समझौता यूक्रेन संघर्ष और पश्चिमी प्रतिबंधों के बाद रूस की ऊर्जा रणनीति में एशिया की ओर बदलाव का हिस्सा है।

d इस डील से रूस के गैस निर्यात का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा अब यूरोप के बजाय चीन जाएगा, जो यूरोप और अमेरिका के ऊर्जा प्रभाव पर सीधा प्रश्न उठाता है। लेन-देन डॉलर के बजाय चीनी युआन और रूसी रूबल में होगा, जो अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में एक नया संकेत देता है।

हालांकि, सितंबर 2025 में हुए समझौते पर अभी अंतिम कानूनी मुहर और गैस की कीमतों पर चीन की पूर्ण सहमति बाकी है। वैश्विक परिस्थितियों में चीन की मजबूत बाजार स्थिति के कारण यह बात अभी खुली है कि समझौता कब तक पूरी तरह लागू होगा। यदि यह धरातल पर उतरता है, तो यह दशक का सबसे बड़ा ऊर्जा और भू-राजनीतिक परिवर्तन साबित हो सकता है।

तथ्य

  • रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने चीन के साथ ऐतिहासिक ऊर्जा समझौते की घोषणा की।
  • पावर ऑफ साइबेरिया-2 पाइपलाइन से रूस, चीन को सालाना 50 अरब क्यूबिक मीटर गैस देगा।
  • पाइपलाइन 2,600 किमी लंबी होगी और यामल प्रायद्वीप से उत्तरी चीन तक जाएगी।
  • समझौते का लेन-देन डॉलर के बजाय युआन और रूबल में होगा।
  • सितंबर 2025 में समझौता हुआ, लेकिन अंतिम कानूनी मुहर अभी बाकी है।
  • रूस के गैस निर्यात का लगभग 30% हिस्सा अब चीन की ओर जाएगा।

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