
फ्रांस लिब्रे नामक यह नया पोत फ्रांस की दीर्घकालिक समुद्री उपस्थिति की घोषणा है। अगर आपके कोई दोस्त या सहकर्मी रक्षा नीति या भू-राजनीति में रुचि रखते हैं, तो यह संदर्भ उनके लिए उपयोगी हो सकता है।

फ्रांस लिब्रे: 78,000 टन की कूटनीति कहानी का प्रवाह और मुख्य तथ्य
फ्रांस अगले दशक में 'फ्रांस लिब्रे' नामक एक नया परमाणु विमानवाहक पोत तैयार कर रहा है, जो 2038 तक परिचालन में आने की उम्मीद है। इसका विस्थापन 78,000 टन होगा, जो फ्रांस के वर्तमान विमानवाहक पोत चार्ल्स डी गॉल (42,000 टन) से लगभग दोगुना है। यह यूरोप का सबसे बड़ा युद्धपोत और एकमात्र परमाणु-संचालित विमानवाहक पोत होगा।
फ्रांस लिब्रे में अमेरिकी निर्मित इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कैटापुल्ट, EMALS और AAG सिस्टम लगेंगे, जिससे विभिन्न प्रकार के विमान और मानव रहित प्रणालियों के साथ बेहतर संगतता होगी। इसके डेक पर 36 राफेल मरीन लड़ाकू विमान तैनात किए जा सकेंगे और भविष्य में अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमान (NGF) को भी समायोजित करने की क्षमता होगी।
इस परियोजना में भारत भी रुचि दिखा रहा है, जिससे दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी मजबूत हो सकती है। पोत के निर्माण की शुरुआत 2031 में होने की उम्मीद है और इसकी लागत 10 अरब यूरो से अधिक अनुमानित है। यह फ्रांस की रणनीतिक स्वायत्तता और वैश्विक समुद्री हितों की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
तथ्य
- फ्रांस लिब्रे 2038 तक परिचालन में आने की उम्मीद है और इसका विस्थापन 78,000 टन होगा।
- इसकी लंबाई 310 मीटर होगी, जबकि चार्ल्स डी गॉल की लंबाई 261.5 मीटर है।
- फ्रांस लिब्रे में अमेरिकी निर्मित EMALS और AAG सिस्टम लगेंगे।
- इस पोत पर 36 राफेल मरीन लड़ाकू विमान तैनात किए जा सकेंगे।
- भारत अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमान (NGF) परियोजना में शामिल होने की इच्छा दिखा रहा है।
- पोत के निर्माण की शुरुआत 2031 में होने की उम्मीद है और इसकी लागत 10 अरब यूरो से अधिक अनुमानित है।
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