
आरबीआई का यह बड़ा वित्तीय योगदान, पश्चिम एशिया संकट के बीच सरकार के लिए राहत का संकेत है, इस विषय पर नजर रखने वाले किसी दोस्त के साथ यह संदर्भ बांटने लायक है।

आरबीआई सरकार को देगा रिकॉर्ड डिविडेंड कहानी का प्रवाह और मुख्य तथ्य
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) इस वित्तीय वर्ष में केंद्र सरकार को अब तक का सबसे बड़ा डिविडेंड देने की तैयारी में है। पिछले वर्ष आरबीआई ने 2.69 लाख करोड़ रुपये का डिविडेंड दिया था, लेकिन इस बार रकम उससे भी अधिक होने की उम्मीद है। यह निर्णय आरबीआई के केंद्रीय बोर्ड की बैठक में लिया जाएगा, जहां संशोधित आर्थिक पूंजी ढांचे (ईसीएफ) के तहत हस्तांतरणीय अधिशेष की गणना की जाती है।
dividend की रकम निर्धारित करने में आकस्मिक जोखिम बफर (सीआरबी) के स्तर का भी महत्वपूर्ण योगदान होता है, जिसे 7.50% से 4.50% के बीच बनाए रखने का प्रावधान है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सरकार को आरबीआई, राष्ट्रीयकृत बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों से कुल 3.16 लाख करोड़ रुपये की आय का अनुमान है।
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) के वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड लाभ के बाद यह उम्मीद बढ़ी है। पीएसबी का कुल नेट प्रॉफिट 1.98 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो लगातार चौथे वर्ष वृद्धि दर्शाता है। बेहतर एसेट क्वालिटी, स्वस्थ ऋण वृद्धि और उच्च आय इसके प्रमुख कारण रहे। यह डिविडेंड सरकार को पश्चिम एशिया में चल रहे संकट और बढ़ते तेल दाम जैसी चुनौतियों के बीच वित्तीय स्थिरता प्रदान कर सकता है।
तथ्य
- आरबीआई इस वित्तीय वर्ष में सरकार को पिछले रिकॉर्ड 2.69 लाख करोड़ से अधिक डिविडेंड देने की तैयारी में है।
- पिछले वर्ष आरबीआई ने 2024-25 के लिए 2.69 लाख करोड़ रुपये का डिविडेंड दिया था।
- वित्त वर्ष 2025-26 में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का कुल नेट प्रॉफिट 1.98 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
- आरबीआई की केंद्रीय बोर्ड बैठक इस महीने डिविडेंड राशि को अंतिम रूप दे सकती है।
- आकस्मिक जोखिम बफर (CRB) को 7.50% से 4.50% के बीच बनाए रखने का प्रावधान है।
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