लद्दाख के चांगथांग में रात के आसमान में तारों भरा आकाश, नीचे एक छोटा गांव और टेलीस्कोप से आकाश का अवलोकन करते पर्यटक दिखाई दे रहे हैं।
लद्दाख के चांगथांग में रात के आसमान में तारों भरा आकाश, नीचे एक छोटा गांव और टेलीस्कोप से आकाश का अवलोकन करते पर्यटक दिखाई दे रहे हैं।

ब्रह्मांड के अद्भुत नजारे देखने का यह अनुभव, खगोल विज्ञान में रुचि रखने वाले किसी दोस्त के साथ समझने लायक संदर्भ देता है।

लद्दाख में आसमान के अद्भुत नजारे कहानी का प्रवाह और मुख्य तथ्य

लद्दाख के चांगथांग क्षेत्र में 20 से 26 मई 2026 तक 'एस्ट्रो सप्ताह' का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम विज्ञान, पर्यटन और प्रकृति के संगम को दर्शाता है और लद्दाख को एक डार्क स्काई डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करने में मदद कर रहा है। आयोजन में देश-विदेश के खगोल विज्ञानियों और वैज्ञानिकों द्वारा आकाश के अवलोकन, सौर अवलोकन, एस्ट्रोफोटोग्राफी प्रदर्शनी और विशेषज्ञ संवाद सत्र शामिल हैं।

चांगथांग के हानले गांव में 1073 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को डार्क स्काई रिजर्व घोषित किया गया है। यहां 4500 मीटर की ऊंचाई पर दुनिया का दूसरा सबसे ऊंचा ऑप्टिकल टेलीस्कोप स्थापित है। इस क्षेत्र की प्रदूषण रहित वातावरण और स्वच्छ आकाशमंडलीय दृश्यता खगोलीय अध्ययन के लिए आदर्श है।

कार्यक्रम का आयोजन लद्दाख पर्यटन विभाग और बेंगलुरु स्थित भारतीय खगोलीय भौतिकी संस्थान (IIOE) के सहयोग से किया जा रहा है। इसके माध्यम से युवाओं में अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाने और स्थानीय समुदाय को एस्ट्रो पर्यटन से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। स्थानीय महिलाओं को होमस्टे स्थापित करने में सहायता दी जा रही है और युवाओं को एस्ट्रो एम्बेसडर बनाया जा रहा है।

तथ्य

  • 20 से 26 मई 2026 तक लद्दाख के चांगथांग में 'एस्ट्रो सप्ताह' का आयोजन होगा।
  • हानले को 2022 में डार्क स्काई रिजर्व घोषित किया गया था, जिसका क्षेत्र 1073 वर्ग किलोमीटर है।
  • 4500 मीटर की ऊंचाई पर हानले में दुनिया का दूसरा सबसे ऊंचा ऑप्टिकल टेलीस्कोप स्थापित है।
  • कार्यक्रम लद्दाख पर्यटन विभाग और भारतीय खगोलीय भौतिकी संस्थान के सहयोग से आयोजित हो रहा है।
  • स्थानीय युवाओं को एस्ट्रो एम्बेसडर बनाया जा रहा है और महिलाओं को होमस्टे स्थापित करने में सहायता दी जा रही है।

Canto का विज़ुअल न्यूज़ एक्सप्लेनर। उत्पादन में AI टूल सहायता कर सकते हैं। संपादकीय नीति