
एक ही कहानी के चार अलग अंदाज, इस विषय को देख रहे किसी दोस्त के साथ समझने लायक संदर्भ देती है।

4 फिल्मों में एक कहानी, सभी सुपरहिट कहानी का प्रवाह और मुख्य तथ्य
बॉलीवुड में एक ही कहानी पर चार अलग-अलग फिल्में बनीं और हर बार सुपरहिट साबित हुईं। ये फिल्में — 1967 की 'मेहरबान', 1983 की 'अवतार', 1990 की 'स्वर्ग' और 2003 की 'बागवान' — आशापूर्णा देवी के बंगाली उपन्यास 'जोग बियोग' पर आधारित थीं। कहानी एक बूढ़े व्यक्ति के गिरते सम्मान और बेटों की उपेक्षा के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसमें परिवार के बीच भावनात्मक दूरी और फिर एकजुटता दिखाई गई। हर फिल्म ने अपने समय के हिसाब से कहानी को नया रूप दिया।
'मेहरबान' में अशोक कुमार ने एक धनी व्यापारी की भूमिका निभाई, जो शेयर बाजार गिरने से गरीब हो जाते हैं और अपने बेटों की उपेक्षा का सामना करते हैं। 1983 में राजेश खन्ना ने 'अवतार' में इसी किरदार को जीवंत किया, जिसका संगीत और डायलॉग आज भी याद किए जाते हैं। 1990 में गोविंदा और राजेश खन्ना ने 'स्वर्ग' में इस कथानक को हल्के स्वर में पेश किया।
2003 में अमिताभ बच्चन और हेमा मालिनी की जोड़ी ने 'बागवान' में इसी कहानी को नया जीवन दिया। शुरुआत में फिल्म कमजोर रही, लेकिन धीरे-धीरे दर्शकों को छू लिया। फिल्म ने 10 करोड़ के बजट पर 43 करोड़ से ज्यादा कमाए। सलमान खान की छोटी भूमिका ने भी फिल्म को संभालने में अहम भूमिका निभाई। इन फिल्मों ने भारतीय परिवार जीवन के बदलते मूल्यों को लगातार दर्शाया।
तथ्य
- 1967 में 'मेहरबान' आशापूर्णा देवी के उपन्यास 'जोग बियोग' पर आधारित पहली फिल्म थी।
- 'अवतार' (1983), 'स्वर्ग' (1990) और 'बागवान' (2003) भी इसी कहानी पर आधारित थीं।
- राजेश खन्ना ने 'अवतार' और 'स्वर्ग' दोनों फिल्मों में मुख्य भूमिका निभाई।
- 'बागवान' ने 10 करोड़ के बजट में 43 करोड़ से ज्यादा कमाए।
- सलमान खान ने 'बागवान' में छोटी लेकिन प्रभावशाली भूमिका निभाई।
- सभी चार फिल्में बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट रहीं।
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