
अंतिम संस्कार के वक्त पैसे न होने की बात, इस विषय को देख रहे किसी दोस्त के साथ समझने लायक संदर्भ देती है।

अमजद खान के अंतिम संस्कार में पैसे नहीं थे कहानी का प्रवाह और मुख्य तथ्य
बॉलीवुड के लीजेंडरी विलेन अमजद खान, जिन्होंने 'शोले' में गब्बर सिंह के किरदार से दर्शकों के दिल पर राज किया, की मौत 1992 में एक भयंकर कार एक्सीडेंट के बाद हुई थी। उनके परिवार ने एक साल तक उनकी गंभीर चोटों के बाद देखभाल की, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण अंतिम संस्कार के लिए भी पैसे नहीं थे। उस समय अमजद खान के बेटे शादाब केवल 18 साल के थे और परिवार के अन्य सदस्य भी छोटे थे। इस मुश्किल घड़ी में सलमान खान के पिता सलीम खान ने चुपचाप सभी खर्च उठाए और शादाब को एक यादगार सीख भी दी।
शादाब खान ने बताया कि सलीम खान ने उन्हें अकेले में बुलाकर कहा कि पठानों की फितरत यह है कि वे आपस में लड़ सकते हैं, लेकिन मुसीबत में एकजुट हो जाते हैं। यह घटना न केवल एक परिवार की आर्थिक लाचारी को दिखाती है, बल्कि फिल्म इंडस्ट्री में इंसानियत के उस पहलू को भी उजागर करती है जो अक्सर चमक-दमक में खो जाता है। सलीम खान की इस मदद ने न सिर्फ एक परिवार की इज्जत बचाई, बल्कि एक युवा को जीवन का महत्वपूर्ण सबक सिखाया।
अमजद खान ने 'शोले', 'मुकद्दर का सिकंदर', 'सत्ते पे सत्ता' जैसी कई हिट फिल्मों में काम किया और विलेन के किरदार में अपनी पहचान बनाई। लेकिन असल जिंदगी में वे एक संवेदनशील और परिवार से जुड़े इंसान थे। उनकी मृत्यु के 35 साल बाद यह कहानी उनके व्यक्तित्व के एक अनछुए पहलू को सामने लाती है। आज भी उनके प्रशंसक उन्हें गब्बर सिंह के रूप में याद करते हैं, लेकिन यह घटना उनके पीछे छिपे मानवीय संघर्ष को भी याद दिलाती है।
तथ्य
- अमजद खान की मौत 1992 में एक कार एक्सीडेंट के बाद हुई थी।
- उनके बेटे शादाब खान ने बताया कि अंतिम संस्कार के लिए पैसे नहीं थे।
- सलीम खान ने चुपचाप सभी खर्च उठाए और शादाब को पठानों की फितरत के बारे में सीख दी।
- शादाब के मुताबिक, सलमान खान अंतिम संस्कार में पहले पहुंचे थे।
- अमजद खान ने 'शोले', 'मुकद्दर का सिकंदर', 'सत्ते पे सत्ता' जैसी फिल्मों में काम किया।
Canto का विज़ुअल न्यूज़ एक्सप्लेनर। उत्पादन में AI टूल सहायता कर सकते हैं। संपादकीय नीति





