
लाहौर में प्रशिक्षण का फैसला द्विपक्षीय संबंधों में बदलाव दिखाता है, इस विषय पर नजर रखने वाले किसी सहकर्मी के लिए यह संदर्भ उपयोगी हो सकता है।

बांग्लादेशी अधिकारी अब लाहौर में प्रशिक्षण ले रहे कहानी का प्रवाह और मुख्य तथ्य
बांग्लादेश के सिविल सेवक अब भारत के मसूरी की जगह पाकिस्तान के लाहौर में प्रशिक्षण ले रहे हैं। यह बदलाव भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव, समझौता ज्ञापन (MoU) की समाप्ति और वीजा संबंधी बाधाओं के बीच आया है। लाहौर स्थित सिविल सर्विसेज एकेडमी में 12 बांग्लादेशी अधिकारी 4 से 21 मई 2026 के बीच प्रशिक्षण के लिए गए हैं।
इस कार्यक्रम का खर्च पाकिस्तान सरकार उठा रही है, जिसमें बांग्लादेश की कोई वित्तीय भागीदारी नहीं है। यह पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच इस तरह का पहला व्यवस्थित प्रशिक्षण कार्यक्रम है। बांग्लादेश के लोक प्रशासन मंत्रालय के अनुसार, प्रशिक्षण के बाद अधिकारियों को एक रिपोर्ट जमा करनी होगी।
इससे पहले, 2014 में शुरू हुए MoU के तहत बांग्लादेशी अधिकारी लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी, मसूरी में प्रशिक्षण लेते थे। 2019 और 2024 के बीच भारत ने 1,019 बांग्लादेशी सिविल सेवकों को प्रशिक्षित किया। अंतिम MoU 30 अप्रैल 2024 को हस्ताक्षरित हुआ था और एक वर्ष तक वैध था। अब यह व्यवस्था समाप्त हो गई है।
तथ्य
- बांग्लादेश के 12 सिविल सेवक 4 से 21 मई 2026 के बीच लाहौर में प्रशिक्षण ले रहे हैं।
- पाकिस्तान सरकार प्रशिक्षण का पूरा खर्च उठा रही है, बांग्लादेश की कोई वित्तीय भागीदारी नहीं है।
- 2014 में शुरू हुए MoU के तहत बांग्लादेशी अधिकारी मसूरी में प्रशिक्षण लेते थे।
- अंतिम MoU 30 अप्रैल 2024 को हस्ताक्षरित हुआ था और एक वर्ष तक वैध था।
- 2019 और 2024 के बीच भारत ने 1,019 बांग्लादेशी सिविल सेवकों को प्रशिक्षित किया।
- यह पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच पहला व्यवस्थित प्रशिक्षण कार्यक्रम है।
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