
नेटवर्क प्राथमिकता के बंटवारे का यह फैसला, इस विषय पर नजर रख रहे किसी सहकर्मी के लिए भी समझने लायक संदर्भ देता है।

एयरटेल का बड़ा दावा: प्रायोरिटी सर्विस नेट न्यूट्रैलिटी का उल्लंघन नहीं कहानी का प्रवाह और मुख्य तथ्य
एयरटेल ने भारत में पहली प्रायोरिटी पोस्टपेड सेवा लॉन्च की है, जो 5G नेटवर्क स्लाइसिंग तकनीक पर आधारित है। इसका उद्देश्य पोस्टपेड ग्राहकों को भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में बेहतर कनेक्टिविटी देना है। सेवा 449 रुपये से शुरू होती है और अभी केवल पोस्टपेड उपयोगकर्ताओं के लिए उपलब्ध है।
इस लॉन्च के बाद संचार मंत्रालय की एक समिति ने नेट न्यूट्रैलिटी के उल्लंघन की आशंका जताते हुए एयरटेल से स्पष्टीकरण मांगा। कंपनी ने जवाब में कहा कि यह सेवा पूरी तरह कंटेंट-न्यूट्रल है और न तो किसी ऐप को ब्लॉक करती है, न ही स्पीड धीमी करती है।
एयरटेल ने बताया कि पीक आवर्स में 5G नेटवर्क की कुल क्षमता का 38% उपयोग होता है, जिसमें पोस्टपेड ट्रैफिक का योगदान 4% है। प्रायोरिटी सेवा लागू होने पर यह 6% तक हो सकता है। कंपनी का दावा है कि प्रीपेड और अन्य गैर-प्रायोरिटी ट्रैफिक के लिए 60% क्षमता अलग रखी गई है, जिससे उनकी सेवा गुणवत्ता प्रभावित नहीं होगी।
कंपनी ने यह भी कहा कि अगर 5G की उन्नत सुविधाओं का उपयोग करने की अनुमति नहीं दी गई, तो भारत में 6G तकनीक के विकास को नुकसान पहुंच सकता है। यह स्पष्टीकरण दूरसंचार विभाग (DoT) की समिति के सामने रखा गया है।
तथ्य
- एयरटेल ने 5G स्लाइसिंग तकनीक पर आधारित प्रायोरिटी पोस्टपेड सेवा लॉन्च की है, जो 449 रुपये से शुरू होती है।
- कंपनी ने सरकार की समिति को बताया कि सेवा कंटेंट-न्यूट्रल है और नेट न्यूट्रैलिटी नियमों का उल्लंघन नहीं करती।
- प्रीपेड और गैर-प्रायोरिटी ट्रैफिक के लिए 60% नेटवर्क क्षमता अलग रखी गई है।
- पीक आवर्स में 5G क्षमता का 38% उपयोग होता है, जिसमें पोस्टपेड ट्रैफिक का योगदान वर्तमान में 4% है।
- एयरटेल का तर्क है कि 5G की उन्नत सुविधाओं पर प्रतिबंध लगाने से भारत में 6G तकनीक के विकास को नुकसान होगा।
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