एक अफगान लड़की स्कूल के बाहर खड़ी है, उसके पीछे एक बंद दरवाजा और तालिबान के झंडे लहराते हुए।
एक अफगान लड़की स्कूल के बाहर खड़ी है, उसके पीछे एक बंद दरवाजा और तालिबान के झंडे लहराते हुए।

अफगानिस्तान में लड़कियों की चुप्पी को शादी की सहमति मानने का नियम, उस दोस्त के लिए भी समझने लायक है जो महिला अधिकारों के मुद्दों पर नजर रखता है।

तालिबान का नया नियम: चुप रहने पर शादी को माना जाएगा हां कहानी का प्रवाह और मुख्य तथ्य

अफगानिस्तान में तालिबान सरकार ने नए विवादास्पद कानून लागू किए हैं, जिनमें लड़कियों की चुप्पी को शादी के लिए सहमति माना जा रहा है। इसके अलावा, नाबालिग लड़कियों की शादी पर पिता या दादा के अधिकार, घरेलू हिंसा में कार्रवाई केवल टूटी हड्डी या गंभीर चोट पर होने तक सीमित, और लड़कियों की छठी कक्षा के बाद शिक्षा पर प्रतिबंध शामिल है।

इन नियमों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर चिंता जताई है। मानवाधिकार संगठनों ने इन्हें महिलाओं के खिलाफ भेदभावपूर्ण और मानवाधिकारों के उल्लंघन के रूप में देखा है। लड़कियों की शिक्षा पर प्रतिबंध के कारण लाखों छात्राओं के भविष्य पर संकट आ गया है।

इसके अलावा, शादी से जुड़े निर्णय में महिलाओं की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाया गया है। अब महिलाएं बिना पति की अनुमति के रिश्तेदारों से नहीं मिल सकतीं। ये नियम 1990 के दशक के तालिबान शासन की याद दिलाते हैं, जब भी महिलाओं के अधिकारों पर कड़े प्रतिबंध थे।

तालिबान ने 2021 में दोबारा सत्ता संभाली थी और शुरुआत में वादा किया था कि महिलाओं को अधिकार दिए जाएंगे, लेकिन धीरे-धीरे प्रतिबंध लागू किए गए। अब ये नए कानून दुनिया भर में महिला अधिकारों की बहस को नए सिरे से तेज कर रहे हैं।

तथ्य

  • तालिबान सरकार ने अफगानिस्तान में लड़कियों की चुप्पी को शादी के लिए सहमति मानने का नियम बनाया है।
  • घरेलू हिंसा में कार्रवाई केवल तभी होगी जब हड्डी टूटे या शरीर पर गंभीर घाव हो।
  • लड़कियों को 12 साल की उम्र के बाद स्कूल जाने की अनुमति नहीं है, यानी छठी कक्षा के बाद शिक्षा पर प्रतिबंध।
  • नाबालिग लड़कियों की शादी उनके पिता या दादा द्वारा की जा सकती है।
  • शादीशुदा महिलाओं को बिना पति की अनुमति के रिश्तेदारों से मिलने पर सजा हो सकती है।

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