
एक घरेलू ब्रांड के उत्थान और पतन की यह बात, इस विषय पर नजर रखने वाले किसी सहकर्मी के साथ समझने लायक संदर्भ देती है।

वीडियोकॉन: एक घरेलू ब्रांड का उत्थान और पतन कहानी का प्रवाह और मुख्य तथ्य
वीडियोकॉन एक समय भारतीय घरों में इलेक्ट्रॉनिक्स का प्रतीक था। 1980 और 90 के दशक में वेणुगोपाल धूत के नेतृत्व में यह ब्रांड टीवी, फ्रिज और वॉशिंग मशीन में बाजार पर राज करता था। जापान की तोशिबा के साथ तकनीकी साझेदारी ने इसे किफायती और विश्वसनीय बनाया। लेकिन 2000 के दशक में कंपनी ने अपने कोर बिजनेस से दूर तेल-गैस, टेलीकॉम, DTH, पावर और रियल एस्टेट जैसे उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में भारी निवेश किया। इसके परिणामस्वरूप कर्ज तेजी से बढ़ा। 2012 में 2G स्पेक्ट्रम रद्दीकरण ने टेलीकॉम इकाई को नुकसान में धकेल दिया। इसके बाद ICICI बैंक से जुड़े लोन घोटाले में वीडियोकॉन के नाम शामिल होने से विश्वास और वित्तीय स्थिरता दोनों डगमगा गए। 2017 में RBI ने इसे 12 प्रमुख डिफॉल्टरों में शामिल किया। 2018 में NCLT ने CIRP शुरू किया। 2020 में वेदांता ग्रुप ने खरीद का प्रस्ताव दिया, लेकिन 2022 में NCLAT ने इसे रद्द कर दिया। अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में है और वीडियोकॉन के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
तथ्य
- वीडियोकॉन कंपनी ₹64,838 करोड़ के कर्ज में डूब चुकी है।
- वेणुगोपाल धूत ने 1985-86 के आसपास वीडियोकॉन इंटरनेशनल की स्थापना की।
- 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने 2G स्पेक्ट्रम लाइसेंस रद्द कर दिए, जिसमें वीडियोकॉन के लाइसेंस भी शामिल थे।
- ICICI बैंक लोन घोटाले में चंदा कोचर, दीपक कोचर और वेणुगोपाल धूत को 2022 में गिरफ्तार किया गया।
- 2018 में NCLT ने वीडियोकॉन के खिलाफ CIRP शुरू किया।
- 2020 में वेदांता ग्रुप ने वीडियोकॉन को खरीदने का प्रस्ताव दिया, जिसे 2022 में NCLAT ने रद्द कर दिया।
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