यूक्रेन के मैदान में एक छोटा रोबोटिक वाहन, जिस पर विस्फोटक लदा हुआ है, धुंधले प्रकाश में आगे बढ़ रहा है। पृष्ठभूमि में ड्रोन उड़ते दिख रहे हैं।
यूक्रेन के मैदान में एक छोटा रोबोटिक वाहन, जिस पर विस्फोटक लदा हुआ है, धुंधले प्रकाश में आगे बढ़ रहा है। पृष्ठभूमि में ड्रोन उड़ते दिख रहे हैं।

मानवरहित हथियारों का बढ़ता उपयोग, इस विषय पर नजर रखने वाले किसी सहकर्मी के लिए भी स्पष्ट संदर्भ देता है।

युद्ध के मैदान में अब मशीनें लड़ रहीं कहानी का प्रवाह और मुख्य तथ्य

यूक्रेन-रूस युद्ध अब मानवरहित प्रणालियों के युग में प्रवेश कर चुका है। यूक्रेनी सेना ने अब मोर्चे पर सैनिकों की जगह ड्रोन और रोबोटिक वाहनों को प्राथमिकता दी है, जिन्हें दूर से नियंत्रित किया जाता है। इस रणनीति के तहत एक ऑपरेशन में कई विस्फोटक लदे रोबोट रूसी ठिकानों पर हमला कर सकते हैं, बिना किसी यूक्रेनी सैनिक के जमीन पर कदम रखे।

यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने बताया कि सेना ने पहली बार केवल रोबोट और ड्रोन के जरिए रूसी ठिकाने पर कब्जा किया है। अब तक इन प्रणालियों ने 22,000 मिशन पूरे किए हैं। रूसी सैनिक इन रोबोटिक बम वाहकों को 'मौन मृत्यु' कह रहे हैं क्योंकि वे इतनी खामोशी से चलते हैं कि आवाज सुनाई देती है तब तक वे विस्फोट क्षेत्र में पहुंच चुके होते हैं।

यूक्रेन का लक्ष्य अब हर महीने लगभग 35,000 रूसी सैनिकों को हताहत करना है, जिसे वे इस साल हासिल करने का दावा करते हैं। इसका उद्देश्य रूसी सरकार पर दबाव बनाना है ताकि वह अधिक सैनिक भर्ती करने के लिए मजबूर हो। ब्रिटेन की खुफिया एजेंसी GCHQ के अनुमान के मुताबिक, रूस के कुल सैन्य मृतकों की संख्या लगभग 500,000 है।

तथ्य

  • यूक्रेनी सेना ने पहली बार केवल रोबोट और ड्रोन के जरिए रूसी ठिकाने पर कब्जा किया।
  • मानवरहित प्रणालियों ने 2026 की शुरुआत से अब तक 22,000 मिशन पूरे किए हैं।
  • रूसी सैनिक यूक्रेनी रोबोटिक बम वाहकों को 'मौन मृत्यु' कहते हैं।
  • यूक्रेन का लक्ष्य हर महीने लगभग 35,000 रूसी सैनिकों को हताहत करना है।
  • ब्रिटेन की GCHQ के अनुसार, रूस के सैन्य मृतकों की संख्या लगभग 500,000 है।

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