
इतने छोटे पिंड पर वायुमंडल मिलना सौरमंडल की समझ बदल सकता है। किसी दोस्त या सहकर्मी को यह खोज उपयोगी लग सकती है।

4.5 अरब साल पुराने छोटे पिंड पर मिला वायुमंडल कहानी का प्रवाह और मुख्य तथ्य
जापानी वैज्ञानिकों ने सौरमंडल के किनारे स्थित कुइपर बेल्ट में एक छोटे खगोलीय पिंड (612533) 2002 XV93 पर पतला वायुमंडल खोजा है। यह पिंड लगभग 500 किलोमीटर चौड़ा है, जो प्लूटो के व्यास (2377 किमी) का केवल एक छोटा हिस्सा है। इसके बावजूद यह अपने आसपास गैस की परत बनाए हुए है, जो पृथ्वी के वायुमंडल की तुलना में 50 लाख से एक करोड़ गुना पतली है।
खोज स्टेलर ओक्यूलेशन तकनीक के जरिए हुई, जिसमें तारे की रोशनी के धीमे कम होने से पता चला कि पिंड के चारों ओर गैस मौजूद है। यह खोज इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पहले माना जाता था कि इतने छोटे पिंड गुरुत्वाकर्षण के कारण गैस नहीं रोक सकते।
वैज्ञानिकों को दो संभावनाएं दिख रही हैं: या तो पिंड के अंदर से क्रायोवोल्केनो (बर्फीले ज्वालामुखी) के जरिए मीथेन या नाइट्रोजन जैसी गैस निकल रही है, या किसी टक्कर के बाद गैस बाहर आई है। अगर टक्कर की वजह से बना है, तो यह वायुमंडल सैकड़ों साल में खत्म हो सकता है। लेकिन अगर आंतरिक गतिविधि से बना है, तो यह लंबे समय तक बना रह सकता है।
तथ्य
- जापानी वैज्ञानिकों ने कुइपर बेल्ट में स्थित (612533) 2002 XV93 नामक 500 किमी चौड़े पिंड पर पतला वायुमंडल खोजा है।
- यह पिंड प्लूटो से लगभग पांच गुना छोटा है, जिसका व्यास 2377 किमी है।
- पिंड का वायुमंडल पृथ्वी के मुकाबले 50 लाख से एक करोड़ गुना पतला है।
- खोज स्टेलर ओक्यूलेशन तकनीक के जरिए हुई, जहां तारे की रोशनी के धीमे कम होने से गैस की उपस्थिति का पता चला।
- वायुमंडल या तो क्रायोवोल्केनो से निकल रही गैस के कारण है या किसी टक्कर के बाद बाहर आई गैस के कारण।
- अगर टक्कर के कारण बना है, तो यह वायुमंडल कुछ सौ साल में खत्म हो सकता है।
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