
तारों के अंतिम चरण का यह दृश्य, खगोल विज्ञान में रुचि रखने वाले किसी दोस्त के लिए समझने लायक संदर्भ देता है।

बूढ़े तारे की आखिरी रोशनी कहानी का प्रवाह और मुख्य तथ्य
यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ईएसए) ने हबल स्पेस टेलीस्कोप के जरिए एनजीसी 6741 नामक प्लैनेटरी नेबुला की एक शानदार तस्वीर जारी की है, जिसे फैंटम स्ट्रीक नेबुला भी कहा जाता है। यह नेबुला पृथ्वी से लगभग 7,000 प्रकाश वर्ष दूर एक्विला तारामंडल में स्थित है और एक मध्यम आकार के तारे के अंतिम चरण को दर्शाता है। जब तारे अपना ईंधन समाप्त कर लेते हैं, तो वे लाल विशाल तारे बन जाते हैं और अपनी बाहरी गैसीय परतों को अंतरिक्ष में छोड़ देते हैं, जो अल्ट्रावॉयलेट प्रकाश में चमकने लगती हैं।
प्लैनेटरी नेबुला नाम भ्रामक है, क्योंकि इसमें कोई ग्रह नहीं होता। 18वीं शताब्दी में खगोलविदों को ये गोलाकार बादल ग्रहों जैसे लगे, इसलिए नाम पड़ा। एनजीसी 6741 की खोज 1882 में एडवर्ड चार्ल्स पिकरिंग ने की थी। यह नेबुला सामान्य गोलाकार आकृति के बजाय आयताकार है, जो चमकते तकिए जैसा दिखता है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि इसकी अनोखी आकृति के पीछे एक बाइनरी स्टार सिस्टम का प्रभाव हो सकता है। चुंबकीय क्षेत्र और पड़ोसी तारों का गुरुत्वाकर्षण भी नेबुला के आकार को प्रभावित करते हैं। ये नेबुला लगभग 10,000 वर्षों तक चमकते रहते हैं, फिर गैस बिखर जाती है और केंद्र में एक सफेद बौना तारा बच जाता है।
तथ्य
- ईएसए ने हबल टेलीस्कोप के जरिए फैंटम स्ट्रीक नेबुला (एनजीसी 6741) की तस्वीर जारी की।
- नेबुला पृथ्वी से लगभग 7,000 प्रकाश वर्ष दूर एक्विला तारामंडल में स्थित है।
- एनजीसी 6741 की खोज 1882 में एडवर्ड चार्ल्स पिकरिंग ने की थी।
- प्लैनेटरी नेबुला नाम भ्रामक है, क्योंकि इसमें ग्रह नहीं होते, बल्कि गैसीय बादल होते हैं।
- इसका आकार आयताकार है, जो बाइनरी स्टार सिस्टम के प्रभाव के कारण हो सकता है।
- प्लैनेटरी नेबुला लगभग 10,000 वर्ष तक चमकते रहते हैं, फिर गैस बिखर जाती है।
Canto का विज़ुअल न्यूज़ एक्सप्लेनर। उत्पादन में AI टूल सहायता कर सकते हैं। संपादकीय नीति





