
50 साल के जुनून का अंतिम मैच, एक क्रिकेट प्रेमी के लिए यह संदर्भ देखने लायक है।

अलविदा 'चाचा क्रिकेट' कहानी का प्रवाह और मुख्य तथ्य
पाकिस्तान क्रिकेट के सबसे पहचाने जाने वाले सुपरफैन 'चाचा क्रिकेट' के नाम से मशहूर 77 वर्षीय अब्दुल जलील ने अपने 50 साल के चीयरलीडिंग सफर को विदा कहने का ऐलान किया है। उनका अंतिम मैच लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम में पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया के बीच होने वाला तीसरा वनडे होगा। जलील ने 1968-69 में लाहौर में एक टेस्ट मैच देखकर क्रिकेट से जुनून शुरू किया था।
1996 में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने उन्हें आधिकारिक मैस्कॉट घोषित किया। 1998 में उन्होंने अपनी नौकरी छोड़कर पूरी तरह से क्रिकेट के लिए समर्पित जीवन जीने का फैसला किया। वे 1999 के वनडे वर्ल्ड कप से लेकर दुनिया भर के मैदानों पर पाकिस्तान का झंडा लहराते नजर आए। उन्होंने 500 अंतरराष्ट्रीय मैच देखने का सपना पूरा कर लिया है।
संन्यास के बाद जलील का अगला लक्ष्य सियालकोट में एक क्रिकेट म्यूजियम और रेस्टोरेंट खोलना है, जहां वे अपने 50 साल के संग्रह — ऑटोग्राफ, तस्वीरें और यादगार सामान — को संरक्षित करेंगे। वे पाकिस्तान के सुनहरे दौर के गवाह रहे हैं, जैसे 1986 में मियांदाद का भारत के खिलाफ छक्का, लेकिन 2011 और 2024 में भारत से हार उनके लिए दर्दनाक रही।
तथ्य
- 77 वर्षीय अब्दुल जलील, जिन्हें 'चाचा क्रिकेट' कहा जाता है, लाहौर में पाकिस्तान बनाम ऑस्ट्रेलिया के तीसरे वनडे के बाद संन्यास लेंगे।
- जलील ने 1968-69 में लाहौर में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट मैच देखकर क्रिकेट से प्यार शुरू किया।
- 1996 में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने उन्हें आधिकारिक मैस्कॉट घोषित किया।
- उन्होंने 1998 में नौकरी छोड़कर पाकिस्तान क्रिकेट के लिए पूरी तरह समर्पित जीवन जीने का फैसला किया।
- जलील ने 500 से अधिक अंतरराष्ट्रीय मैच देखे हैं और अब सियालकोट में क्रिकेट म्यूजियम खोलने की योजना बना रहे हैं।
- वे 1986 में मियांदाद के छक्के को अपनी सबसे बड़ी खुशी और 2011 व 2024 में भारत से हार को सबसे बड़ा दर्द बताते हैं।
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